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Bihar Bridge Safety Alert: पुल टूटा तो नहीं बचेंगे अफसर! बिहार सरकार ने इंजीनियरों को किया हाई अलर्ट

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बिहार सरकार ने पुलों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब पुलों के रखरखाव और निगरानी में लापरवाही होने पर इंजीनियरों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक पर कार्रवाई होगी। मानसून से पहले हाई अलर्ट जारी किया गया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में लगातार पुलों और सड़कों की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राज्य सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। हाल के महीनों में कई जगहों पर पुलों में दरार, क्षति और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब यदि किसी पुल में लापरवाही पाई जाती है या उसकी खराब स्थिति के कारण कोई हादसा होता है, तो केवल छोटे कर्मचारियों पर नहीं बल्कि इंजीनियरों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पथ निर्माण विभाग ने इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू करने का संकेत दिया है।राज्य सरकार की ओर से यह सख्ती ऐसे समय में सामने आई है जब मानसून शुरू होने वाला है और बारिश के मौसम में पुलों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। सरकार का मानना है कि समय रहते निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो बड़े हादसे हो सकते हैं। इसी वजह से पथ निर्माण विभाग ने राज्यभर के इंजीनियरों और अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।

शनिवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने साफ शब्दों में कहा कि पुलों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी पुल को नुकसान पहुंचता है और जांच में अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, परियोजना से जुड़े अधिकारी और मुख्यालय स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारी भी जिम्मेदार माने जाएंगे।

बैठक में राज्यभर के पुलों की वर्तमान स्थिति, उनके रखरखाव और सुरक्षा ऑडिट को लेकर विस्तार से समीक्षा की गई। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि हर पुल का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए और किसी भी तकनीकी कमजोरी को तुरंत दूर किया जाए। सचिव ने कहा कि पुलों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी जरूरी है।

सरकार की सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है। बारिश के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने से पुलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई बार तेज बहाव और कटाव के कारण पुलों की नींव तक प्रभावित हो जाती है। ऐसे में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यही वजह है कि इस बार मानसून से पहले ही सभी जिलों के इंजीनियरों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

पथ निर्माण विभाग ने सभी एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में मौजूद छोटे और बड़े पुलों का लगातार निरीक्षण करें। यदि कहीं दरार, झुकाव, कंपन या अन्य तकनीकी समस्या दिखाई दे तो तत्काल रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई शुरू की जाए। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि किसी भी शिकायत को हल्के में न लें।

बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग यानी NH विंग को भी विशेष निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने सभी पुलों का सुरक्षा ऑडिट तत्काल प्रभाव से कराया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भारी वाहनों के दबाव और बारिश के मौसम में पुल पूरी तरह सुरक्षित रहें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर ढिलाई सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

इस महत्वपूर्ण बैठक में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, बिहार राज्य सड़क विकास निगम और नेशनल हाईवे विंग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान सभी एजेंसियों को आपसी समन्वय बढ़ाने और तकनीकी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए। सरकार चाहती है कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल हो ताकि किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में पुलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में नदियां बहती हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों को जोड़ने में पुल अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि किसी पुल में तकनीकी खामी आती है तो इसका सीधा असर लाखों लोगों की आवाजाही और सुरक्षा पर पड़ता है।

पिछले कुछ वर्षों में बिहार में कई पुलों को लेकर विवाद और सवाल उठ चुके हैं। कहीं निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए तो कहीं रखरखाव में लापरवाही की शिकायतें सामने आईं। सोशल मीडिया पर भी पुलों की स्थिति को लेकर कई वीडियो वायरल हुए थे। इन्हीं घटनाओं के बाद सरकार अब कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही है।

सरकार का मानना है कि केवल नया पुल बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसकी नियमित मॉनिटरिंग और रखरखाव भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के तहत अब सुरक्षा ऑडिट को ज्यादा गंभीरता से लागू करने की तैयारी की जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में पुलों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा सकता है।

सड़क और पुल विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर निरीक्षण, गुणवत्ता जांच और मरम्मत कार्य होते रहने से बड़े हादसों को रोका जा सकता है। खासकर मानसून के दौरान अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होती है क्योंकि इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा रहता है।

सरकार के इस फैसले को आम लोगों के बीच सकारात्मक कदम माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी तो निर्माण और रखरखाव में सुधार आएगा। इससे सड़क और पुलों की गुणवत्ता बेहतर होगी और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सकेगी।

कुल मिलाकर बिहार सरकार अब पुलों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। मानसून से पहले जारी हाई अलर्ट और अधिकारियों को दी गई सख्त चेतावनी इस बात का संकेत है कि अब लापरवाही करने वालों पर सीधी कार्रवाई होगी। आने वाले दिनों में यह फैसला राज्य की यातायात व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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